Tuesday, February 7, 2012

हलाल और झटका / सआदत हसन मंटो

“मैंने उसकी शहरग पर छुरी रखी, हौले-हौले फेरी और उसको हलाल कर दिया।”
“यह तुमने क्या किया?”
“क्यों?”
“इसको हलाल क्यों किया?”
“मज़ा आता है इस तरह.”
“मज़ा आता है के बच्चे…..तुझे झटका करना चाहिए था….इस तरह. ”
और हलाल करने वाले की गर्दन का झटका हो गया।

(शहरग – शरीर का सबसे बड़ा शिरा जो हृदय में मिलता है)
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