Saturday, March 17, 2012

नसीरूद्दीन शाह के लिए

इक अदाकार हूँ मैं !
मैं अदाकार हूँ ना
जीनी पड़ती हैं कई जिंदगियां एक हयाती में मुझे !

मेरा किरदार बदल जाता है, हर रोज़ ही सेट पर,
मेरे हालात बदल जाते हैं
मेरा chehra भी बदल जाता है, अफ़साना-ओ-मंज़र के मुताबिक
मेरी आदत बदल जाती है
और फिर दाग़ नहीं छूटते पहनी हुयी पोशाकों के
ख़स्ता किरदारों का कुछ चूरा सा रह जाता है तह में
कोई नुकीला-सा किरदार गुजरता है रगों से
तो खराशों के निशां देर तलक रहते हैं दिल पर
ज़िन्दगी से ये उठाये हुए किरदार
ख्याली भी नहीं हैं
की उतर जाएँ वो पंखे की हवा से
स्याही रह जाती है सीने में , अदीबों के लिखे जुमलों की
सीमीं परदे पे लिखी
सांस लेती हुई तहरीर नज़र आता हूँ
मैं अदाकार हूँ लेकिन
सिर्फ अदाकार नहीं
वक़्त की तस्वीर भी हूँ ...

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