Friday, April 6, 2012

आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा
किश्ती के मुसाफ़िर ने समुन्दर नहीं देखा

बेवक्त अगर जाऊंगा सब चौंक पड़ेंगे
इक्क उम्र हुई दिन में कभी घर नहीं देखा

जिस दिन से चला हूँ मेरी मंज़िल पे नज़र है
आँखों ने कभी मील का पत्थर नहीं देखा

ये फूल मुझे कोई विरासत में मिले हैं
तुम ने मेरा काँटों भरा बिस्तर नहीं देखा

पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला
मैं मोम हूँ उसने मुझे छूकर नहीं देखा.

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