Friday, October 4, 2013

खिड़की चाँद किताब और मैं
मुद्दत से इक बाब और मैं 
शब् भर खेलें आपस में 
दो ऑंखें इक ख़ाब और मैं 
मौज और कश्ती साहिल पर 
दरिया में गर्दाब और मैं 
शाम , उदासी, ख़ामोशी 
कुछ कंकर तालाब और मैं ..
हर शब् पकड़े जाते हैं 
गहरी नींद, तेरे ख़ाब और मैं ...फ़ैसल 
(*बाब- सागर , शब्- रात , गर्दाब-लहरें )

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