Saturday, October 12, 2013

बदलते मौसमों की सैर में 
दिल को लगाना हो 
किसी को याद रखना हो 
किसी को भूल जाना हो 
हमेशा देर कर देता हूँ मैं.... 

किसी को मौत से पहले 
किसी ग़म से बचाना हो 
हकीक़त कुछ और थी 
उस को जा के ये बताना हो 
हमेशा देर कर देता हूँ मैं... Munir Niazi

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