Sunday, May 10, 2015

दिल में कुछ और, जुबां पे कुछ और बात करता हैं ,
खंजर हाथ में लिए हुए मोहब्बत की बात करता हैं !
सुना है मैने प्यार, दोस्ती - वफ़ा सब अमीरो की ज़ागीर है,
मै खाली जेबें टटोलता हुँ, वो बिछड़ने की बात करता है !!
लाज़िमी हैं उसका मुझसे यूँ खफ़ा होना भी ,
मैं शिद्द्त से उसे चाहता हूँ वो बनावट की बात करता हैं !
उन्हें शिक़ायत है मेरे गुफ्तगू के तरीको से,
मुझे ख़ामोशी हैं पसंद, वो अल्फ़ाजों से बात करता हैं !!
हुनरमन्द हैं वो जो हैं खुद को बदलने की फिक्र में " रेहान ",
नादान हैं वो जो ज़माने को बदलने की बात करता हैं ....!!!!
-चंद्रेश सिंदल "रेहान"

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